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मंझधार
Jan 14, 2018
3 minutes read


तो व्याख्या करूँगा कि तुम शायद वो सोच लो जो मैं तुम्हे बताना चाहता हूँ,
और शायद तुम एक शायद में ना रहो।

तो पलंग पर अँगड़ाईयाँ लेते हुए मैं बात कर रहा था उस से,
तो बात करते-करते उसने कह ही दिया की हो तो तुम काफिर ही,
इक मंझधार पे खड़े हो और कहते हो की समंदर तुम में है कही,
कि साकी की इक झलक देखी और कहते हो की तुम से ज्यादा मदमय कोई कहाँ।

फिर अगली सुबह जो तकिये पे बातों को छोड़ उठा, तो कुछ तो चुभ रहा था।
मैंने भी सोचा नाखूनों को साफ़ कर लूँ, की कही से कुछ चैन मिले।

दोस्तों, नाखूनों को काँटना भी इक कला है, बचपन में पापा ने सिखाया था।
हर रविवार वो बृहस्पति जैसे बैठते और सांस लेते छोड़ते नख काटते।
वो गंभीर सी मुद्रा, इक आदत बन गयी मेरी।
शायद यही पर मेरी कोई शायद नहीं चलती और शायद यही पर मै मै रह जाता।

मै भी सोचता रहा, कि शायद वो सही था,
कि शायद मैं मंझधार पे ही था,
कि शायद जो आगे जाता, तो डूब जाता,
कि शायद जो पीछे आता, तो छूट जाता।

कि शायद, शायद, शायद।

फिर इक नख काटा,
तो गिले-शिकवे आये।
इक और काटा,
तो आँख भर आयी।
इक और काटा,
तो चेहरे के रंग दिख गए।
इक और काटा,
तो आत्म विश्वास झकझोर गया।
इक और काटा,
तो लफ्ज़ टूटने लगे।

इक और काटा,
तो तारे खूबसूरत दिखने लगे।
इक और काटा,
तो पता चला कमरे में अकेला मैं नहीं।
इक और काटा,
तो वो बैठा ही हुआ, बढ़ चला मेरी ओर कहीं।
इक और काटा,
तो मालूम चली कुछ बातें अनकही।
इक और काटा,
तो पता लगा कि मैं बोलने में मैं भी कहीं।

पहली बार पता चला की गीत में तुम खुद को सोच सकते हो,
दूसरो को क्यूँ मांगते, खुद के लिए खुद खुद को मांग सकते हो।

अगले पल तुम्हे जो कुछ बनना, इस पल अमल सकते हो,
शायद शायद की ज़िन्दगी छोटी है, यक़ीनन कह सकते हो।


काफिर - Infidel
मंझधार - Midstream
साकी - One who pours liquor
अमल - Implement

I performed this at a TLS event. It is my attempt to make sense of a lot of experiences we friends had. The song referenced is: Dekh Tera Kya/Latthay Di Chaadar. This photograph is from Chandrataal Lake.

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